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राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त को श्रद्धांजलि अर्पित की —


शहाब सिद्दीकी-
लखनऊ-
भारत रत्न स्वर्गीय गोविन्द बल्लभ पन्त की 131वीं जयन्ती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री ग्राम विकास डाॅ0 महेन्द्र सिंह, लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया सहित अन्य विशिष्ट जनों ने लोक भवन के प्रांगण में स्थित पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित करके अपनी श्रद्धांजलि दी।
राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त के व्यक्तित्व में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की देशभक्ति, महात्मा गांधी की शांति प्रियता और सरदार पटेल की दृढ़ इच्छा की धार थी। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह, नमक आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन सहित अन्य आन्दोलनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा कारागार की यातनाएं भी झेली। सरदार पटेल की मृत्यु के बाद उन्होंने जमींदारी उन्मूलन को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा हिन्दी को राजभाषा का स्थान दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होने कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त को सदैव उनके गुणों और राष्ट्र सेवा के लिए स्मरण किया जाता रहेगा।
श्री नाईक ने कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त आचार्य नरेन्द्र देव, कैलाश नाथ काटजू जैसे लोगों के सहपाठी थे। 1914 से वेे ब्रिटिश राज्य के विरोध में सक्रिय रहे तथा स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रभावी नेता थे। वकील के नाते उन्होंने सामाजिक कार्य प्रारम्भ किया। उन्होंने विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करते हुए देश की सेवा की। तीन बार वे प्रदेश के मुख्यमंत्री और केन्द्र में गृहमंत्री भी रहे। काकोरी रेल केस में वे बिस्मिल और अन्य स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीदों के वकील भी रहे। लोकतंत्र को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। हमारे युवा ऐसे महापुरूषों के विचारों के अनुकूल बनने का संकल्प लें। उन्होने कहा कि संकल्प सिद्धि ही महापुरूषों के प्रति सच्ची आदरांजलि होगी।
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सम्बोधन में कहा कि वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे तथा प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भी थे । उत्तराखण्ड के छोटे से गांव में जन्म लेकर उन्होंने देश के स्वतंत्रता आन्दोलन को नई दिशा दी। आजादी से पूर्व और आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। हिन्दी को देश की राजभाषा के रूप में स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत माता के ऐसे महान सपूत प्रखर स्वतंत्रता सेनानी को आज हम सब श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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