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नही रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बाजपेयी , जानिए मौत से जुड़े हुए तथ्य–


Team News9 24×7
रंजीत सिंह राठौर, खुर्सीद आलम, शहाब सिद्दीकी

लखनऊ-
भारत की राजनीति के एक और अध्याय का आज उस वक्त समापन हो गया जब नई दिल्ली के एम्स में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने आज सायं 05 बजे अंतिम सांस ली ।
भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे और देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को निधन हो गया। वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में शाम पांच बजकर पांच मिनट पर अंतिम सांस ली। पूर्व प्रधानमंत्री पिछले कई सालों से बीमार चल रहे थे। 25 दिसंबर 1924 को पैदा हुए वाजपेयी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राजनीति में प्रवेश किया था और राजनीतिक संघर्षों के बाद तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने।

किडनी में संक्रमण, छाती में संकुचन और पेशाब संबंधी परेशानी की वजह से वाजपेयी को गत 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स में भर्ती वाजपेयी की तबीयत गत शनिवार को ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। पूर्व प्रधानमंत्री की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही उनका हालचाल जानने के लिए नेताओं का तांता लग गया।

जनता दर्शन के लिए कल भाजपा कार्यालय में रखा जाएगा पार्थिव शरीर

भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू ने अस्पताल जाकर उनके अंतिम दर्शन किए। विपक्ष के कई नेता भी वाजपेयी का देखने के लिए अस्पताल पहुंचे।

बुधवार को भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने एम्स का दौरा किया और वाजपेयी के स्वास्थ्य का हाल जाना। अस्पताल का दौरा करने वालों में स्मृति ईरानी, मिनाक्षी लेखी, हर्षवर्धन, पीयूष गोयल, अरुण जेटली की पत्नी और बेटी शामिल हैं। एम्स में वाजपेयी के भर्ती होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच बार वहां का दौरा किया।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनके लिए संरक्षक के समान थे। नीतीश ने कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें वाजपेयी का स्नेह और सलाह मिला। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वाजपेयी की राजनीति आज के दौर की सियासत से अलग थी। वह राजनेता थे। जब उनकी सरकार गिर रही थी तो हमारी पार्टी ने उनका समर्थन किया।

अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी जैसे ही सामने आई, देश भर में उनके जीवन के लिए दुआएं मांगी जाने लगी। कई जगहों पर लोगों ने हवन किया और ईश्वर से उनके उम्र के लिए दुआएं मांगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वाजपेयी जी उनके संरक्षक के समान थे। उन्होंने कहा, ‘मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे अटल जी का प्यार और सलाह मिला। वह मेरे लिए संरक्षक के समान थे। मैं उनके शीघ्र ठीक होने की कामना करता हूं।’

आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। वाजपेयी जी की पहली सरकार 13 दिनों और फिर 13 महीने तक चली। अटल जी की तीसरी बार 2009 में चुनकर आए और 26 सहयोगी दलों के समर्थन से उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने एक गैर-कांग्रेसी सरकार का कार्यकाल पूरा किया। अपनी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते उन्होंने साल 2005 में सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।

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